Bihar Board 10th Social Science Viral Subjective Question 2026: बिहार बोर्ड 20 फरवरी 2026, 10th सामाजिक विज्ञान वायरल सब्जेक्टिव प्रश्न, यहाँ से देखें?
नमस्कार दोस्तों आप भी 20 फरवरी के दिन सामाजिक विज्ञान का पेपर देने जा रहे हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है क्योंकि इस आर्टिकल के माध्यम से हम 20 फरवरी के लिए सामाजिक विज्ञान का वायरल सब्जेक्टिव प्रश्न बताने वाले हैं।
प्रथम एवं द्वितीय पाली के विद्यार्थियों के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न होने वाला है क्योंकि आप सभी विद्यार्थी को हमने ऑब्जेक्टिव प्रश्न बतला दिया है आप पिछला आर्टिकल देख सकते हैं लेकिन इस आर्टिकल के माध्यम से आपको वायरल सब्जेक्टिव प्रश्न बताने वाले हैं जो की प्रथम एवं द्वितीय पाली में पूछे जाएंगे
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जो भी विद्यार्थी व्हाट्सएप चैनल को फॉलो नहीं किया है आप सभी विद्यार्थी अभी जाकर व्हाट्सएप चैनल को जरूर से फॉलो कर लीजिए क्योंकि व्हाट्सएप चैनल में आप सभी विद्यार्थियों को वायरल क्वेश्चन पेपर परीक्षा के कुछ समय पहले देने वाले हैं इसीलिए जो मैट्रिक के विद्यार्थी है सामाजिक विज्ञान का वायरल क्वेश्चन पेपर प्राप्त करना चाहते हैं प्रथम एवं द्वितीय पाली तो आपको व्हाट्सएप चैनल को जरूर से फॉलो कर लेना है ऊपर लिंक दिया गया हैं।
Bihar Board 10th Social Science Viral Subjective Question 2026:-
20 फरवरी के दिन सामाजिक विज्ञान में जो जो वायरल सब्जेक्टिव प्रश्न प्रथम एवं द्वितीय पाली में आने वाला है सभी प्रश्न नीचे निम्नलिखित दे दिए गए हैं आप देख सकते हैं।
1. 1848 के फ्रांसीसी क्रांति के क्या कारण थे ? [2013, 14, 19, 20, 22, 24]
उत्तर:- लुई फिलिप ने गीजो को प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जो कट्टर प्रतिक्रियावादी था। वह किसी भी तरह के वैधानिक, सामाजिक एवं आर्थिक सुधारों के विरूद्ध था। लुई फिलिप ने पूँजीपति वर्ग को साथ रखना पसन्द किया। उसके पास किसी भी तरह का सुधारात्मक कार्यक्रम नहीं था और न ही उसे विदेश नीति में ही किसी तरह की सफलता हासिल हो रही था। उसके शासन काल में देश में भुखमरी एवं बेरोजगारी व्याप्त होने लगी, जिसकी वजह से गीजों की आलोचना होने लगी। इसी कारण 1848 में फ्रांसीसी क्रांति हुआ।
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2. राष्ट्रवाद के उदय के कारणों और प्रभाव का चर्चा करें। [2014,18,24]
उत्तर:- यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के निम्नलिखित कारण हैं- फ्रांसीसी क्रांति- फ्रांसीसी क्रांति ने राजनीति को अभिजात्यवर्गीय परिवेश से बाहर कर उसे अखबारों, सड़कों और सर्वसाधारण की वस्तु बना दिया।
नेपोलियन का अभियान- यूरोप के कई राज्यों में नेपोलियन के अभियानों द्वारा नवयुग का संदेश पहुँचा। नेपोलियन ने जर्मनी और इटली के राज्यों को एक राजनीतिक रूपरेखा प्रदान की, जिससे इटली और जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
राष्ट्रवाद के उदय के प्रभाव :- राष्ट्रीयता की भावना से प्रेरित होकर अनेक राष्ट्रों में क्रांतियां, आंदोलन और नए रास्ते का उदय होने लगा।
राष्ट्रवाद का प्रभाव एशिया- अफ्रीका के उपनिवेशों पर भी पड़ा। राष्ट्रवाद के विकास ने प्रतिक्रियावादी शक्तियों और निरंकुश शासको का प्रभाव कमजोर कर दिया। राष्ट्रवादी प्रवृत्ति ने साम्राज्यवादी प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। भारत भी यूरोपीय राष्ट्रवाद से प्रभावित हुआ।
3. मुद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व को कैसे प्रभावित किया? [2017AI, 2020All, 2022AI]
उत्तर- उत्तर-मुद्रण क्रांति ने आम लोगों के जीवन में व्यापक परिवर्तन ला दिया। मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप पुस्तकें समाज के सभी वर्गों तक पहुँच गई। पाठकों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी। मुद्रण क्रांति के साथ ही छापाखाना की संख्या में वृद्धि के परिणामस्वरूप पुस्तक निर्माण में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। जरूरत के अनुरूप पुस्तकों की उपलब्धता के फलस्वरूप सूचना, ज्ञान और संस्था से लोग तेजी से जुड़ते चले गये। जिसके परिणामस्वरूप लोक चेतना एवं दृष्टि में बदलाव संभव हुआ।
04. नगर निगम की आय के प्रमुख स्रोत को बतायें ? [2012, 2015, 2023]
- उत्तर :- नगर परिषद के आय के स्रोत:-
- राज्य सरकार के द्वारा अनुदान
- सफाई कर
- व्यवसाय कर
- शिक्षा कर
- मनोरंजन कर
- वाहन कर
- विज्ञापन कर
05. लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की क्या आवश्यकता हैं। [2016, 2019, 2023]
उत्तर: – राजनीतिक दल लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में काफी महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। जनता की विभिन्न समस्याओं के समाधान में राजनीतिक दल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसीलिए लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में राजनीतिक दलों की आवश्यकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसी भी शासन-व्यवस्था में किसी भी समस्या पर हजारों लोग अपना विचार रखते हैं।
किन्तु, इन विचारों और दृष्टिकोणों का कोई मतलब नहीं रह जाता है जब तक इन विचारों को किसी दल के विचारों से न जोड़ा जाए। राजनीतिक दल देश के लोगों की भावनाओं एवं विचारों को जोड़ने का ाम करते हैं। इस दृष्टि से हमारे लिए राजनीतिक दलों की आवश्यकता है। यदि दल नहीं होगा तो सभी उम्मीदवार निर्दलीय होंगे। उम्मीदवार अपनी नीतियाँ राष्ट्रहीत में न बनाकर उस क्षेत्र विशेष के लिए बनाएँगे जिन क्षेत्रों से वे चुनाव लड़ रहे हैं।
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06. क्या आतंकवाद लोकतंत्र की चुनौती है? स्पष्ट करें। [2012, 2013, 2014, 2015, 2017, 2020]
उत्तर:- धमकी, हिंसा, हत्या, अपहरण और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करके शासन पर अपनी बात को मनवाने के लिए दबाव बनाना आतंकवाद कहलाता है। आतंकवाद के जन्म के मूल कारणों में धार्मिक कट्टरता या आर्थिक विषमता होती है। हिंसा किसी भी राजनीतिक व्यवस्था के लिए अच्छी नहीं होती है। लोकतंत्र में हिंसा या आतंक उत्पन्न हो जाता है जिससे लोकतांत्रिक काम-काज पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
अतः आतंकवाद लोकतंत्र के लिए चुनौती होता जा रहा है। आतंकवाद पूरे विश्व में एक ज्वलंत मुद्दा बन गया है। जिसका समाधान विश्व स्तर पर भी हो रहा है। फिर भी आतंकवाद दुनिया के लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था में चुनौती है। यह चुनौती लोकतंत्र के लिए घातक बनता जा रहा है।
07. आर्थिक विकास क्या है? आर्थिक विकास तथा आर्थिक वृद्धि में अंतर बतावें। [2012A, 2014All, 2023AI]
उत्तर:- प्रो. मेयर एवं बाल्डविन के अनुसार “आर्थिक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा दीर्घ काल में किसी अर्थव्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है”।
सामान्यतः आर्थिक विकास और आर्थिक वृद्धि में कोई अंतर नहीं माना जाता है। दोनों शब्द एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है। लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों के द्वारा दोनों के बीच अंतर क्या जाने लगा हैं। आर्थिक वृद्धि शब्द का प्रयोग विकसित देशों के लिए किया जाता है और आर्थिक विकास का प्रयोग विकासशील देशों के लिए किया जाता हैं।

14. परिवारवाद और जातिवाद बिहार में किस तरह लोकतंत्र को प्रभावित करता है?
उत्तर:- बिहार की राजनीति में परिवारवाद और जातिवाद दो प्रमुख समस्याएँ हैं, जो लोकतंत्र की गुणवत्ता और समान अवसर की भावना को प्रभावित करती हैं।
परिवारवाद का मतलब है – राजनीति में एक ही परिवार के कई सदस्यों का वर्चस्व। इससे आम जनता की भागीदारी सीमित हो जाती है और योग्य लोगों को अवसर नहीं मिल पाता। नेता का चयन कार्यकुशलता की बजाय वंश परंपरा से होने लगता है।
जातिवाद के कारण राजनीतिक दल चुनाव में जातिगत समीकरणों को प्राथमिकता देते हैं। इससे मुद्दों की राजनीति की जगह पहचान की राजनीति हावी हो जाती है। जनता भी नीतियों की बजाय जाति के आधार पर वोट डालने लगती है।
इन दोनों प्रवृत्तियों से लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता घटती है, जिससे शासन प्रणाली कमजोर होती है। समाधान के रूप में – राजनीतिक जागरूकता, शिक्षा, और योग्यता आधारित नेतृत्व को बढ़ावा देना जरूरी है।

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